बिहार 2025 चुनाव — Detailed Analysis by Ravi Pandey

बिहार 2025 चुनाव — Detailed Analysis by Ravi Pandey

1️⃣ वोट शेयर और मतदान ट्रेंड

  • इस चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 67% दर्ज किया गया, यह पिछले चुनावों की तुलना में बहुत ऊँचा है।
  • महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर थी—कई रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला वोटर पुरुषों से ~9-10% अधिक मतदान कर रही थीं।
  • इस तरह का जनादेश यह दिखाता है कि जनता सिर्फ पुरानी जातिगत राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास-मुद्दों, कल्याण कार्यक्रमों और नेतृत्व की विश्वसनीयता पर मतदान कर रही है।

2️⃣ जाति-पैटर्न (Caste Arithmetic)

  • इस चुनाव में EBC (Extremely Backward Classes) NDA के लिए गेम-चेंजर बने।
  • भारत आज की रिपोर्ट कहती है कि NDA ने सिर्फ पारंपरिक “उच्च जाति + OBC” समूह ही नहीं, बल्कि EBC और दलित वर्गों का भी समर्थन हासिल किया है।
  • दलित वोटर्स (SC) भी इस चुनाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका में थे।
  • दूसरी ओर, महागठबंधन (RJD-Congress इत्यादि) ने अपने जातिगत समूह (जैसे MY = मुस्लिम-यादव) को व्यापक पैमाने पर फैला नहीं पाया, जिससे उसका चयनगत लाभ सीमित रहा।
  • कुछ सीटों पर जातिगत टकराव भी दिखा, जहां एक ही समुदाय के दो प्रत्याशी आमने-सामने थे, जिससे वोट बैंक विभाजित हो सकता था।

3️⃣ महिलामूल्य (Ladies Factor)

  • महिलाओं की मतदान भागीदारी इतना ज़्यादा बढ़ी कि इसे “गेम-चेंजर” कहा जा रहा है।
  • राजनीतिक दलों ने महिला-केंद्रित वादे किए: NDA ने “महिला रोज़गार योजना” जैसे स्कीम के माध्यम से महिलाओं को वोट बैंक बनाया।
  • विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं ने विकास-मुखी नीतियों, आर्थिक कल्याण और कल्याण योजनाओं को ध्यान में रखकर मतदान किया, न सिर्फ जातिगत पहचान के आधार पर।
  • कई जिलों में महिला मतदान पुरुषों से 10% या उससे ज्यादा आगे दिखा, जो एनडीए के लिए बहुत बड़ा स्ट्रैटेजिक फायदा था।

4️⃣ वोट कटिंग (Vote Cutting) और रंगदारी-चेतावनी (Law & Order) का प्रभाव

  • महागठबंधन ने चुनाव में “वोट चोरी / कटिंग” की बात उठाई, लेकिन प्रदर्शन पर यह विषय उतनी गूंज नहीं बना पाया जितना उन्हें उम्मीद थी।
  • एनडीए ने “क़ानून-व्यवस्था, रंगदारी (माफ़िया तत्व) और पिछली सरकारों की लापरवाही” को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया।
  • युवा और EBC मतदाताओं के बीच यह संदेश गया कि पिछली सरकारों में “अराजकता और गैर-कानूनी तत्वों (rangdari)” को दबाने की ज़रूरत है — और NDA ने इसे अपने प्रचार में प्रभावी ढंग से पेश किया।
  • हालांकि, SIR (Special Intensive Revision) जैसे मतदाता-सूची संशोधन मुद्दों की रिपोर्ट भी आ रही है, जहाँ कुछ सीटों पर मतदाता सूची से हटाए गए नाम विजयी मार्जिन से ज़्यादा हो सकते हैं, जिससे कटिंग या नतीजों पर विवाद की संभावना हो सकती है।

5️⃣ अन्य कारक (Other Key Factors)

  • युवा मतदाताओं का बहुत महत्त्वपूर्ण रोल रहा है। India Today की रिपोर्ट में कहा गया है कि युवा (युवा-पॉपुलेशन) और EBC + महिला मतदाता NDA के लिए निर्णायक कदम साबित हुए हैं।
  • नीतिगत वादे और विकास: NDA ने महिला-कल्याण व विकास-मुद्दों (कामगारों, बेरोज़गारों) को केंद्र में रखा और उसने कई कल्याणकारी योजनाओं को प्रचार में प्रमुखता दी।
  • Nitish कुमार की लोकप्रियता: नीतिश कुमार का महिला-वोट बैंक में पहले से ही मजबूत आधार है, और उन्होंने इसे इस चुनाव में मजबूती से इस्तेमाल किया।

6️⃣ निष्कर्ष (Ravi Pandey की दृष्टि से)

  • 2025 का बिहार चुनाव सिर्फ जाति-राजनीति का नहीं था, बल्कि महिला सत्ता + विकास एजेंडा + EBC + युवा उम्मीदों का भी था।
  • NDA ने अपनी रणनीति बहुत चतुराई से बनाई — उसने “महिला-समृद्धि + कानून-व्यवस्था + EBC कल्याण” को मिला कर एक व्यापक वोट बैंक खड़ा किया।
  • महागठबंधन शायद बिल्कुल उसी पुरानी जातिगत समीकरण (जैसे MY = मुस्लिम-यादव) पर निर्भर रह गया, और इस बार वह उस तरह के बदलाव ला पाने में सफल नहीं हुआ जैसा उन्हें उम्मीद थी।
  • महिलाओं की बढ़ी भागीदारी और उनकी कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित नीतिगत अपील NDA को जीत दिलाने में बहुत अहम रही।
  • यदि महागठबंधन को आगे चलकर प्रतिस्पर्धी बने रहना है, तो उसे सिर्फ जातिगत वोटिंग पर नहीं, बल्कि विकास-मिशन + सामाजिक कल्याण पर भी अपनी रणनीति बनानी होगी।

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